कालीमठ में हक-हकूकधारियों की उपेक्षा पर रोष
सिद्धपीठ पंचगाई समिति ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अधिकारों और प्रतिनिधित्व की मांग उठा

कालीमठl सिद्धपीठ कालीमाई पंचगाई समिति कालीमठ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर क्षेत्र के पांचों गांवों (कालीमठ, कविलठा, ब्यूंखी, बेड़ुला और जग्गी बगवान) के हक-हकूकधारियों के अधिकार सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। समिति का आरोप है कि सदियों से भगवती काली माई की सेवा और सभी पारंपरिक अनुष्ठान संपादित करने के बावजूद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) द्वारा उनके योगदान को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
ब्रिटिश काल में बीकेटीसी के गठन के बाद से ही पंचगाईं के निवासियों को हाशिए पर धकेल दिया गया है। समिति के अनुसार, मंदिर परिसर में कार्यालय जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है और आज तक पंचगाईं के किसी भी व्यक्ति को बीकेटीसी का सदस्य नहीं बनाया गया है, जबकि गैर-संबंधित लोगों को इसमें प्रतिनिधित्व मिलता रहा है।
वर्तमान में भगवती काली माई की पवित्र दिवारा यात्रा चल रही है, जिसमें शिव-शक्ति मिलन के बाद बदरीनाथ धाम जाकर अयुत चंडी महायज्ञ का निमंत्रण दिया जाएगा। इन सभी विशाल धार्मिक आयोजनों का संचालन पंचगाई समिति ही करती है, जबकि राजस्व बीकेटीसी के पास जाता है। पत्र भेजे जाने के एक पखवाड़े बाद भी शासन से कोई प्रतिक्रिया न मिलने से पांचों गांवों के ग्रामीणों में भारी निराशा और आक्रोश है।

