उत्तराखंड के पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान
दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन गोष्ठी में तय होगी विश्व पर्यटन मानचित्र की नई दिशा
निवेश, रोजगार, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन विकास के नए मॉडल पर होगी व्यापक चर्चा, मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ

अमर हिन्दुस्तान
देहरादून।उत्तराखंड को विश्व पर्यटन की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करने, करोड़ों रुपये के नए निवेश आकर्षित करने, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने और राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। इसी उद्देश्य के साथ 15 एवं 16 जुलाई को देहरादून स्थित पुनर्नवा वेलनेस रिसॉर्ट में दो दिवसीय ‘पर्यटन विचार एवं चिंतन गोष्ठी’ का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक सामान्य सम्मेलन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन के भविष्य की नई रूपरेखा तैयार करने वाला मंच माना जा रहा है, जहां देश और विदेश के विशेषज्ञ राज्य में पर्यटन की नई संभावनाओं, निवेश, आधुनिक पर्यटन मॉडल और रोजगार सृजन के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श करेंगे।इस दो दिवसीय गोष्ठी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित पर्यटन विशेषज्ञ, विवाह आयोजन विशेषज्ञ, स्वास्थ्य पर्यटन विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े अनेक विशेषज्ञ भाग लेंगे। उत्तराखंड को वैश्विक स्तर का पर्यटन केंद्र बनाने के लिए विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी।
गोष्ठी में गंतव्य विवाह, स्वास्थ्य पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन, प्राकृतिक पर्यटन, निवेश की संभावनाएं, स्थानीय रोजगार, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन से जुड़े आधुनिक मॉडल जैसे विषयों पर विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड की पर्यटन क्षमता को नई दिशा देना तथा राज्य को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए व्यवहारिक सुझाव तैयार करना है।कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किए जाने का प्रस्ताव है। आयोजन में पर्यटन नीति को और अधिक प्रभावी बनाने, निजी निवेश को बढ़ावा देने, स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को पर्यटन से जोड़ने तथा युवाओं के लिए रोजगार के स्थायी अवसर सृजित करने पर भी विशेष चर्चा होगी।
उत्तराखंड को वैश्विक पर्यटन पहचान दिलाने का लक्ष्य : आचार्य आशीष सेमवाल
पुनर्नवा वेलनेस रिसॉर्ट के प्रबंध निदेशक आचार्य आशीष सेमवाल ने कहा कि उत्तराखंड केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रदेश नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, योग, स्वास्थ्य, संस्कृति और लोक परंपराओं की अनमोल धरोहर है। यदि राज्य में गंतव्य विवाह, स्वास्थ्य पर्यटन और आध्यात्मिक पर्यटन को सुनियोजित ढंग से विकसित किया जाए तो उत्तराखंड देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग और मजबूत पहचान बना सकता है।उन्होंने कहा कि इस चिंतन गोष्ठी का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर ऐसे ठोस सुझाव तैयार करना है, जिनके माध्यम से राज्य में पर्यटन निवेश को गति मिले, स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर विकसित हों, ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिले तथा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्राप्त हो। उन्होंने विश्वास जताया कि इस मंथन से निकलने वाले सुझाव राज्य के पर्यटन विकास की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

